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केदारनाथ से बीजेपी विधायक शैलारानी का निधन, 2012 में बनी थी पहली बार विधायक

देहरादून। केदरानाथ से भाजपा विधायक शैलारानी रावत का मंगलवार रात निधन हो गया। वह 68 वर्ष की थीं और लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं। उन्होंने देहरादून के मैक्स अस्पताल में रात 10 बजकर 35 मिनट पर अंतिम सांस ली। विधायक के निजी सचिव पपेंद्र रावत ने बताया कि वह दो दिन से वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ रही थीं।

मुख्‍यमंत्री पुष्‍कर सिंह धामी ने शैलारानी रावत के निधन पर शोक व्‍यक्‍त किया है। उन्‍होंने कहा कि केदारनाथ विधानसभा से लोकप्रिय विधायक शैला रानी रावत जी के निधन का अत्यंत पीड़ादायक समाचार प्राप्त हुआ। उनका जाना पार्टी और क्षेत्रवासियों के लिये अपूरणीय क्षति है। उनकी कर्तव्यनिष्ठा और जनसेवा के प्रति समर्पण भाव को सदैव याद रखा जाएगा।ईश्वर से दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान एवं शोक संतप्त परिजनों व समर्थकों को यह असीम कष्ट सहने की शक्ति प्रदान करने की कामना करता हूं।

पहले भी मौत के मुंह से निकलकर वापस आई थी शैलारानी


शैलारानी रावत वर्ष 2017 में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान वह गिर गई थीं, जिसमें उन्हें चोट आई थी। इस बीच वह गंभीर बीमारी की चपेट में आ गईं। करीब तीन साल तक चले इलाज के बाद वह स्वस्थ्य होकर फिर से राजनीति में सक्रिय हो गईं। दो महीने पहले वह फिर ओंकारेश्वर मंदिर की सीढ़ियों से गिरकर घायल हो गईं।

पहली बार वर्ष 2012 में दर्ज की थी जीत


रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर होने के कारण उन्हें मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। दो दिन पहले ही उनकी बेटी ऐश्वर्या रावत ने इंटरनेट मीडिया में एक भावुक पोस्ट डालकर उनके स्वस्थ्य होने की कामना की थी। शैलारानी केदारनाथ से दो बार विधायक रहीं। पहली बार वर्ष 2012 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की थी।

वर्ष 2016 में वह भाजपा में शामिल हुईं थीं। वर्ष 2022 में वह भाजपा के टिकट पर जीतकर विधानसभा पहुंचीं। वह सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक संगठनों से जुड़ीं रहीं। उन्होंने उत्तराखंड राज्य आंदोलन में भी सक्रिय भागीदारी निभाई। साथ ही पंचायत चुनाव में भी सक्रिय रहीं। 1997 में वह अगस्त्यमुनि विकासखंड की प्रमुख चुनी गईं। 2003 में उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव जीता था।

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