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2,500 साल से चली आ रही है परंपरा के अंतर्गत नए रावल के तिलपात्र की तैयारी, जानें मुख्य पुजारी ने क्यों दिया इस्तीफा?

देहरादून। बदरीनाथ धाम में नए रावल के तिलपात्र की तैयारियों में बीकेटीसी जुट गई है। 13 और 14 को तिलपात्र की प्रक्रियाएं होंगी। इन प्रक्रियाओं के दौरान वर्तमान रावल नए रावल को पाठ, मंत्र के साथ गुरु मंत्र भी देंगे, जिसके बाद नए रावल 14 जुलाई को शयनकालीन पूजा के लिए छड़ी के साथ मंदिर में प्रवेश करेंगे। इसी के साथ वह धाम में पूजा-अर्चना शुरू कर देंगे।

वर्तमान रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी के इस्तीफे के बाद बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति ने धाम में तैनात नायब रावल अमरनाथ नंबूदरी को नए रावल के लिए नियुक्त कर दिया है। मंदिर में पूजा अर्चना शुरू करने और गर्भगृह में प्रवेश से पहले नए रावल का तिलपात्र किया जाएगा। तिलपात्र के तहत विभिन्न प्रक्रियाएं संपन्न की जाती हैं। धाम में ढाई सौ साल से रावल परंपरा चल रही है और नए रावल की तैनाती के लिए तिलपात्र की भी।

भव्य था विदाई समारोह-

बदरीनाथ धाम के प्रभारी अधिकारी/ मुख्य प्रशासनिक अधिकारी गिरीश चौहान ने बताया है कि निवर्तमान रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी का विदाई सम्मान समारोह भी 14 जुलाई को विधिवत संपन्न हुआ। जिसमें मंदिर समिति पदाधिकारी,अधिकारी-कर्मचारी एवं तीर्थ पुरोहित सेवानिवृत्त रावल को विदाई दिए।

आखिर मुख्य पुजारी ने क्यों दिया इस्तीफा?

निवर्तमान रावल ईश्वर प्रसाद ने स्वास्थ्य कारणों से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति हेतु आवेदन किया था। अजय ने बताया कि रविवार से बद्रीनाथ धाम में नए रावल के हाथों भगवान बदरी विशाल की पूजा होंगी।

तिलपात्र के दौरान क्या होंगी प्रक्रियाएं ?

13 जुलाई को सबसे पहले नवनियुक्त रावल का मुंडन किया जाएगा। उसके बाद जनेऊ बदला जाएगा। फिर वे बदरीनाथ धाम में स्थित पंच धाराओं कुर्मधारा, प्रह्लाद धारा, इंद्र धारा, उर्वशी और भृगु धारा में स्नान करेंगे। स्नान के बाद रावल बदरीनाथ मंदिर में आएंगे। मंदिर में धर्माधिकारी और वेदपाठी वैदिक मंत्रोचार के साथ तिलपात्र की प्रक्रियाएं संपन्न कराएंगे। सभी प्रक्रियाओं को करने के बाद हवन किया जाएगा।

अगले दिन 14 जुलाई को सुबह वर्तमान रावल भगवान बद्री विशाल का अभिषेक करेंगे और बालभोग लगाएंगे। इस प्रक्रिया में नए रावल भी मौजूद रहेंगे। बालभोग के बाद वर्तमान रावल नए रावल को पाठ, मंत्र व गुरुमंत्र (मंदिर में होने वाली पूजाएं, मंत्र आदि) देंगे जिसके बाद नए रावल अपने निवास पर चले जाएंगे। 14 जुलाई को शयनकालीन पूजा करने के लिए नए रावल छड़ी के साथ मंदिर में प्रवेश करेंगे और बदरीनाथ में होने वाली सभी पूजाएं शुरू करेंगे। बदरीनाथ के पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल ने बताया कि वर्तमान रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी का 2014 में तिलपात्र उन्होंने ही संपन्न कराया था।

कैसी होती है बद्रीनाथ के रावल की दिनचर्या?

  • बद्रीनाथ मंदिर के रावल कपाट खुलने से कपाट बंद होने तक निरंतर 6 महीनों तक बद्रीनाथ धाम में ही रहते हैं और भगवान की नियमित पूजा-अर्चना करते हैं।
  • पूरे 6 माह तक रावल अलकनंदा नदी पार नहीं करते हैं और नारायण पर्वत पर ही निवास करते हैं।
  • बामन द्वादशी पर पहली बार बद्रीनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी अपने आवास से बाहर निकल कर माता मूर्ति मंदिर जाते हैं।
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