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हाथरस हादसे का गुनहगार कब होगा गिरफ्तार ? योगी ने कहा लेंगे कड़ा एक्शन

हाथरस हादसे में अब तक 121 लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे के बाद से कई नेताओं के बयान सामने आ चुके हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को हाथरस जाकर अस्पतालों में घायलों का हालचाल जाना और घटनास्थल का दौरा किया। सीएम योगी ने इस हादसे में घायल हुए लोगों और मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की घोषणा की है।

घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद सीएम योगी ने कहा कि निर्दोष लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने वालों की जवाबदेही तय होगी। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग इस तरह की दुखद घटनाओं पर राजनीति करने से बाज नहीं आते। अब तो उन सज्जनों के साथ उन लोगों की भी फोटो सार्वजनिक हो गई है जो आज बयान दे रहे हैं। जनता सब देख रही है।

सेवादारों की लापरवाही से हुआ हादसा

सीएम ने यह भी कहा कि जब भक्त श्रद्धा के साथ धार्मिक सभा में आते हैं, तो आयोजन में अनुशासन होता है। लेकिन जब ऐसे कार्यक्रमों में कुछ साजिश होती है, तो इस तरह की घटनाएं होती हैं। सेवादारों ने प्रशासन का सहयोग नहीं लिया। सेवादारों ने लोगों को मरने दिया और खुद भाग खड़े हुए।

हादसे की असली वजह क्या थी ?

बाबा के गाड़ियों का काफिला निकलते ही भक्त जीटी रोड नेशनल हाईवे की तरफ दौड़ पड़े। पहले रास्ते में लगभग 10 फुट चौड़ी और 300 मीटर लंबी अस्थाई सड़क थी, जो खासकर बाबा की गाड़ियों के लिए बनाई गई थी। दूसरी दिशा में पंडाल का मुख्य द्वार था, जहां से हजारों भक्त हाईवे पर पहुंचकर बाबा के दर्शन की कोशिश कर रहे थे। बाबा का काफिला आगे निकलते ही लाखों की भीड़ तेजी से नेशनल हाईवे पर पहुंची, लेकिन वहां पहले से मौजूद महिलाओं और बच्चों को भगदड़ का सबसे पहले शिकार होना पड़ा।

क्या है घटना के बाद का हाल ?

हाथरस हादसे के दौरान जो लोग अपने परिजनों को खो चुके हैं, उनकी संख्या 100 से अधिक है। अभी भी कुछ लोग अपने अपहृत परिजनों की तलाश में हैं। इस भयावह घटना के बाद से कई लोग लापता हो गए हैं, और उनके परिजन उन्हें ढूंढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। इनमें से एक हैं कासगंज निवासी 46 साल के राकेश कुमार, जो अपनी 50 वर्षीय बहन हरबेजी देवी की तलाश में व्यस्त हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने अनेक स्थानों पर जांच की, लेकिन बहन अभी भी लापता हैं। प्रशासन ने मृतकों की सूची देखी और हेल्पलाइन नंबरों पर कॉल किया, लेकिन अब तक कोई सफलता नहीं मिली।

राकेश कुमार ने कहा, “मैं अलीगढ़ के एक गांव में रहता हूं। मुझे मंगलवार को मेरे बहनोई का फोन आया, जिन्होंने बताया कि हरबेजी बाबा के सत्संग में गई थीं लेकिन वापस नहीं आईं। मेरे पड़ोसी (जो कार्यक्रम में शामिल थे) उनके घर पहुंच गए थे। पूछताछ में पता चला कि कुछ शव हाथरस और अलीगढ़ भेजे गए हैं। इस पर मैंने बहन की तलाश में वहां जाँच की। मैंने आपातकालीन वार्ड की भी जांच की जहां घायलों का इलाज हो रहा था, लेकिन उन्हें नहीं मिला। मेरी बहन हरबेजी के चार बच्चे हैं – दो बेटियां और दो बेटे। उनकी लापता होने से घर में मातम मचा हुआ है। परिजन अनहोनी की चिंता से डर रहे हैं और प्रशासन से मदद मांग रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई सहायता नहीं मिली है। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, उनका दिल घबरा रहा है।”

अनहोनी का दर और अपनो की तलाश करती निगाहें

राकेश कुमार के तरह ही कई और लोग भी अपने लापता परिवार के सदस्यों की तलाश में या अपने प्रियजनों के शव लेने के लिए आसपास के जिलों से आगरा पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे थे। मथुरा के विशाल कुमार ने बताया कि घटना के समाचार सुनकर वह मौके पर गए और हर जगह तलाश की, लेकिन उनकी मां पुष्पा देवी देवी को नहीं मिली। विशाल कुमार ने कहा, “अंत में हमें पता चला कि उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए आगरा भेज दिया गया है। मैं यहां आया, क्योंकि मां को लगभग दस सालों से ‘भोले बाबा’ की भक्त थीं।” इसके अलावा, आगरा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि मंगलवार को भगदड़ के बाद से अब तक 21 शव पोस्टमार्टम के लिए यहां लाए गए हैं।

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