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यह गलती बिल्कुल न करें, वरना हो सकती है भयंकर बीमारी, जानिए क्या है वजह और सावधानियां ?

भारत के विभिन्न राज्यों में बरसात की शुरुआत हो गई है। इस समय में बारिश का आनंद लेने के साथ-साथ ध्यान भी देना अत्यधिक महत्वपूर्ण है। जल भराव या दूषित पानी में जाने से लेप्टोस्पायरोसिस जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है।

मानसून में लेप्टोस्पायरोसिस नामक बीमारी हो सकती है, जो बारिश के मौसम में जल भराव के कारण होती है। यह बीमारी लेप्टोस्पायरा नामक बैक्टीरिया से फैलती है। डॉक्टर बताते हैं कि इस बीमारी में अधिकतर मामलों में देखा गया है कि इंसान संक्रमित जानवर के मल/मूत्र, दूषित पानी या खान-पान के संपर्क में आने से संक्रमित होता है। यह बैक्टीरिया मुख, आंख और नाक के जरिए शरीर में प्रवेश करता है और गंदगी वाले स्थानों पर पनपता है।

डॉक्टर ने सलाह दी कि आप बरसाती मौसम में एडवेंचर मूड में अगर निकलते हैं, तो थोड़ी सावधानी बरतें। अगर आपको वॉटर एक्टिविटी जैसे राफ्टिंग, स्विमिंग, पूल पार्टी आदि पसंद है, तो सुरक्षित रहकर मज़े लें। लेप्टोस्पायरोसिस के संक्रमण के मामले में पहले कुछ दिन आम लक्षण आ सकते हैं। बीमारी के गंभीर लक्षण में आंखों में खुजली, पेशाब करने में परेशानी, उल्टी और दस्त, मांसपेशियों में तेज दर्द जैसी परेशानियाँ हो सकती हैं।

इस मानसूनी बारिश में अपने बेबी का कैसे रखें ख्याल ?

बच्चों के लिए मानसून के टिप्स: गर्मी के बाद बरसात का मौसम लोगों को बहुत पसंद आता है, लेकिन यह मौसम बीमारियों के लिए भी खतरा लेकर आता है। इस समय में संक्रमण का खतरा बढ़ता है, खासकर बच्चों के लिए। नए पेरेंट्स को अपने बच्चों का ध्यान विशेष रूप से रखना चाहिए।

बरसात में बच्चों का ध्यान रखने के लिए ये टिप्स फॉलो करें: बारिश के मौसम में बच्चों को भीगने से बचाएं। अगर बाहर जाना जरूरी हो, तो उन्हें छाता या रेनकोट जरूर पहनाएं। बच्चों को सुखे, सूती कपड़े पहनाएं और ठंडे मौसम में हल्के मोटे कपड़े पहनाएं, ताकि उन्हें मौसम की नमी से बचाया जा सके।

मानसून के दौरान बीमारियों से बचने के लिए कुछ अतिरिक्त उपाय भी कर सकते हैं:

  1. प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करें: स्वस्थ और संतुलित आहार लें जिसमें हरी सब्जियां, फल, और प्रोटीन शामिल हों।
  2. फिटनेस और व्यायाम: नियमित रूप से व्यायाम करें जिससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़े।
  3. विटामिन और सप्लीमेंट्स: डॉक्टर की सलाह से विटामिन सी और जिंक जैसे सप्लीमेंट्स लें, जो इम्यूनिटी को बढ़ावा देते हैं।
  4. कपड़े: सूती कपड़े पहनें जो जल्दी सूख जाते हैं और पसीने को सोखते हैं, जिससे त्वचा संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।
  5. बारिश में भीगने से बचें: अगर जरूरी न हो तो बारिश में भीगने से बचें, और भीग जाने पर तुरंत सूखे कपड़े पहनें।
  6. गंदगी और कीचड़ से बचाव: गंदे और कीचड़ भरे स्थानों से बचें ताकि संक्रमण न फैले।
  7. आराम: पर्याप्त नींद लें और शरीर को आराम दें ताकि इम्यून सिस्टम मजबूत रहे।

इन सभी उपायों से मानसून में बीमारियों से बचाव में मदद मिल सकती है।

मानसूनी बारिश से गर्भवती महिलाएं कैसे रखें अपना ध्यान

गर्भवती महिलाओं के लिए मलेरिया एक गंभीर स्वास्थ्य जोखिम हो सकता है, विशेष रूप से मानसून के दौरान जब मलेरिया फैलाने वाले मच्छर तेजी से पनपते हैं। यहां कुछ महत्वपूर्ण बातें और सुझाव दिए गए हैं जो गर्भवती महिलाओं को मलेरिया से बचने और उससे निपटने में मदद कर सकते हैं:

मलेरिया के लक्षण

  • तेज बुखार: शरीर का तापमान अचानक बढ़ जाना।
  • सिरदर्द: लगातार और तीव्र सिरदर्द।
  • मांसपेशियों में दर्द: शरीर में विशेषकर मांसपेशियों में दर्द।
  • ठंड लगना: ठंड के साथ कंपकंपी।
  • उल्टी और दस्त: पेट संबंधी समस्याएं।

गर्भवती महिलाओं के लिए मलेरिया के खतरे

  1. एनीमिया (खून की कमी): मलेरिया से खून की कमी हो सकती है, जो गर्भवती महिलाओं और उनके भ्रूण दोनों के लिए खतरनाक है।
  2. गर्भपात और प्रीमैच्योर डिलीवरी: मलेरिया से गर्भपात या समय से पहले डिलीवरी का खतरा बढ़ जाता है।
  3. प्लेसेंटल मलेरिया: प्लेसेंटा (गर्भनाल) में मलेरिया होने से भ्रूण का विकास प्रभावित हो सकता है।
  4. जन्म के समय कम वजन: मलेरिया के कारण शिशु का जन्म वजन कम हो सकता है।

मलेरिया से बचाव के उपाय

  1. मच्छरों से बचाव:
    • मच्छरदानी का उपयोग: सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।
    • मच्छर भगाने वाले क्रीम और स्प्रे: त्वचा पर मच्छर भगाने वाले क्रीम का उपयोग करें।
    • पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें: शरीर को ढककर रखें ताकि मच्छर काट न सकें।
    • मच्छर भगाने वाले उपकरण: इलेक्ट्रॉनिक मच्छर भगाने वाले उपकरणों का उपयोग करें।
  2. घर की साफ-सफाई:
    • पानी जमा न होने दें: घर के आसपास और छत पर पानी जमा न होने दें ताकि मच्छर न पनप सकें।
    • साफ-सफाई का ध्यान रखें: नियमित रूप से घर की साफ-सफाई करें।
  3. स्वास्थ्य की जांच:
    • नियमित जांच: गर्भावस्था के दौरान नियमित रूप से डॉक्टर से जांच करवाएं।
    • मलेरिया की दवा: डॉक्टर की सलाह से मलेरिया की रोकथाम के लिए उचित दवाएं लें।
  4. पोषण का ध्यान रखें:
    • संतुलित आहार: पौष्टिक और संतुलित आहार लें जिससे प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे।
    • हाइड्रेशन: पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।

मलेरिया का इलाज

  • डॉक्टर की सलाह: मलेरिया के लक्षण महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
  • निर्धारित दवाएं: डॉक्टर द्वारा निर्धारित मलेरिया की दवाएं समय पर लें।

इन सुझावों का पालन करके गर्भवती महिलाएं मानसून के दौरान मलेरिया से बचाव कर सकती हैं और अपने तथा अपने शिशु के स्वास्थ्य को सुरक्षित रख सकती हैं।

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